दोस्तों शुरुआत चाहे जैसी भी हो लेकिन अगर आपके अंदर कुछ कर जाने का जुनून है तो फिर आप छोटी से छोटी शुरुआत को भी बड़ा अंजाम दे सकते है,

और आज की हमारी ये कहानी भी एक ऐसी ही कंपनी के बारे में है जिसने सिर्फ ₹295 के साथ शुरुआत करके खुद को एक सर्वश्रेष्ठ कंपनी बना ली,

और छोटे से घर से शुरु हुई ये कंपनी आज 60 से भी ज्यादा देशों में अपने लाजवाब Biscuit और Dairy Products के लिए जानी जाती है, 


Britannia

जी हां दोस्त मैं बात कर रहा हूं हम सब के बीच काफी जानी मानी कंपनी Britannia के बारे में जिसकी शुरुआत आज से कई दशक पहले ही हो चुकी थी,

लेकिन एक कमरे से शुरु होकर इस कंपनी किस तरह से 60 से भी ज्यादा देशों में अपनी Products के जरिए राज किया आज की कहानी में हम पूरी बात को जानेंगे,

दोस्त इस कहानी की शुरुआत होती है आज से कई दशक पहले 1892 से, British Businessman के Group ने सिर्फ ₹295 के निवेश के साथ इस कंपनी को शुरू किया था,

और दोस्तों शुरुआती समय में यह कंपनी सिर्फ और सिर्फ बिस्कुट ही बनाया करती थी जिसका उत्पादन Central Kolkata के एक छोटे से घर में हुआ करता था,

हालांकि जब इसकी शुरुआत की गई थी तब इसके Founders को यह पता तो बिल्कुल भी नहीं था कि छोटे से घर में शुरू की गई यह कंपनी 100 साल से ज्यादा समय तक चल पाएगी,

लेकिन इसकी बेहतरीन Quality और कम रेट की वजह से बहुत ही तेज से यह Market में फैलने लगा था और फिर आगे चलकर भारतीय लोगों ने जब आजादी के लिए जबरदस्त लड़ाई शुरू कर दी

तब British Businessman ने कंपनी को किसी भारतीय को बेचना सही समझा और Gupta Brothers ने Britannia को खरीद लिया

और इसमें जो मुख्य हिस्सेदार थे उनका नाम था नलिन चन्द्र गुप्ता, हालाकि 1918 आते आते कंपनी को बड़े स्तर पर के जाने के लिए Gupta Brothers ने अंग्रेज़ Businessman C.H. Haoms को पार्टनर बना लिया और फिर यहां से कंपनी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा,

Britannia Success Story


क्योंकि C.H. के आने के बाद से 1924 में ब्रिटानिया ने अपना एक और फैक्ट्री मुंबई में भी खोला और अब दिन बीतने के साथ ही  कंपनी भी तेजी से मशहूर होने लगी थी,

और फिर आगे चलकर जब कुछ साल के बाद World War 2 शुरू हुआ तब अचानक ही  बिस्कुट की मांग बहुत तेजी से बढ़ गई,

और यही वजह थी कि ब्रिटानिया को अपने सेल्स को बढ़ाने में काफी मदद मिल गई और इस दौरान कंपनी ने प्रोडक्शन के मामले में अभी तक के सारे रिकॉर्ड तोड डाले थे

 और फिर जब भारत 1947  आजाद हो गया तब इसके बाद भी कंपनी कि लोकप्रियता बढ़ती ही गई और Biscuit Segment  का ज्यादातर Market Share अब ब्रिटानिया के पास ही था

और फिर इसी तरह आगे चलकर इसका 1979 में नाम एक बार फिर बदल कर Britannia Industries Limited कर दिया गया हालाकि इस कंपनी की ओनरशिप कई बार बदली इसकी वजह से इसे कई सारे Complicated Process से गुजरना पड़ा

और दोस्तो केरल Based Businessman Rajan Pillai और Nusli Wadiya के बीच मालिकाना हक़ के लिए एक लम्बी लड़ाई भी चली थी

हालाकि Rajan Pillai की मौत के बाद से ब्रिटानिया का पूरा कंट्रोल Nusli Wadiya के पास चला गया और दोस्तो इसी तरह से कंपनी को भी कई दशकों तक कई सारे विवादों से जूझना पड़ा है

लेकिन अच्छी बात यह थी कि जो भी लोग इस कंपनी के मालिक हुए उन्होंने कभी भी इस कंपनी की लोकप्रियता काम नहीं होने दी और यही वजह थी कि कंपनी के अंदर कई सारे विवाद थे

लेकिन इसके प्रोडक्ट में कभी भी कोई कमी नहीं आयी और दोस्तो 1998 -2001  बीच Britannia की सेल्स 16% की दर से बढ़ी थी जोकि दूसरी कंपनियों के मुकाबले बहुत अधिक थी


Britania Success Story


और अभी के Data को देखा जाय तो कंपनी 27%  दर से हर साल बढ़त में चल रही है और यह आंकड़े कंपनी की सफलता को साफ साफ दर्शाते है

और दोस्तो Britannia अब केवल बिस्कुट में ही नहीं बल्कि Bread और Dairy Products की तरह ही कई सारी चिजों का Deal करता है

पर जैसा की मैंने आपको पहले ही बताया है ये कंपनी सिर्फ भारत में ही नहीं है बल्कि 60 से भी ज्यादा देशों में यह अपनी शानदार Food Products के लिए जानी जाती है

और दोस्तो अंत में में बस यही कहना चाहता हूं कि छोटे से कमरे से शुरू होकर जिस तरह ब्रिटानिया आज 60 से भी ज्यादा देशों में फ़ैल चुका है इससे हम यही सीख लेनी चाहिए कि अगर आप सच्चे रास्ते पर चलेंगे तो सफलता ना मिले हो ही नहीं सकता

‌उम्मीद करते है भारत के सबसे पुराने Brands में से एक ब्रिटानिया की यह कहानी आपको जरूर पसंद आयी होगी

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!